हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सोमवार को सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में केस डायरी, एफएसएल जांच रिपोर्ट और बच्ची की मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसका खंडपीठ ने अवलोकन किया। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि अदालत मामले में पुलिस अनुसंधान पूरा होने का इंतजार करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे सुनवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई जून माह में निर्धारित की गई है।

हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मामले में मृतका की मां रेशमी देवी, भीम राम सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का आरोप है कि तंत्र-मंत्र के नाम पर बच्ची की हत्या की गई और इसमें भीम राम ने सहयोग किया। मामले की पहली सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि बच्ची के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। कोर्ट के समक्ष घटना से संबंधित समाचार पत्रों की कटिंग भी प्रस्तुत की गई थी, जिसके बाद अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए झालसा सचिव और हजारीबाग एसपी को वर्चुअल रूप से तलब किया था।सुनवाई के दौरान कोर्ट को जानकारी दी गई थी कि घटना 24 मार्च को हुई थी, जबकि प्राथमिकी 25 मार्च को दर्ज की गई। कोर्ट ने हजारीबाग एसपी से जांच की प्रगति, वैज्ञानिक अनुसंधान और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सवाल किए थे। पुलिस ने बताया था कि मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि घटना के छह दिन बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने यह भी पूछा था कि मृत बच्ची के कपड़े और अन्य साक्ष्यों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है या नहीं। कोर्ट ने कहा था कि फॉरेंसिक जांच में देरी से साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं।

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